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रेलवे अधोसंरचना विकास
November 28, 2019 • जगदीश सिकरवार • देश- विदेश

रेलवे अधोसंरचना विकास के हुए अभिनव प्रयास, सरकार रखे जारी

त्तीसगढ़ राज्य के गठन के पूर्व राज्य में लगभग 1186 किमी का रेलवे नेटवर्क था। राज्य में रेल अधोसंरचनाओं, का विकास करने के लिए राज्य सरकार ने अभिनव प्रयास कर रेल मंत्रालय तथा भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के साथ मिलकर संयुक्त उपक्रम कंपनियां बनाई, जिसके माध्यम से नई रेल लाइनों का विकास किया जा रहा है। राज्य में वर्तमान में 5 नई रेल (लाइन 1) ईस्ट रेल कॉरीडोर (प्रथम चरण व द्वितीय चरण) (ईस्ट-वेस्ट रेल कॉरीडोर 3) दल्लीराजहरा-रावघाट 4) रावघाट-जगदलपुर की परियोजनाओं में 11000 करोड़ रुपए से अधिक की लगभग 565 किमी से अधिक रेल लाइन का भूअर्जन निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा मात्र 220 करोड़ रुपए की राशि का निवेश किया जाएगा। हमारी सरकार ने न केवल यह सपना देखा था बल्कि उसे साकार करने के प्रयास भी तेजी से थे। दल्लीराजहरा से भानुप्रतापपुर तक लाइन बिछाई जाकर यात्री गाड़ी का परिचालन किया जा रहा है। हमारी दूरगामी सोच का नतीजा है कि मात्र 220 करोड़ रुपए की राशि की इक्विटी से 11000 करोड़ रुपए से अधिक की नई रेललाइन विकास के कार्य प्रदेश में संपन्न किए जाने की स्थिति बन गई है। इस 220 करोड़ रुपए की इक्विटी के विभिन्न संयुक्त उपक्रमों में निवेश पर राज्य को संबंधित संयुक्त उपक्रम के लाभ में से लाभांश पाने की पात्रता भी रहेगी, जिससे कुछ वर्षों के अंतराल में यह कदम राज्य के लिए आय का एक नया स्रोत रचित करेगासंयुक्त उपक्रम कंपनियां ये रेल लाइन कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट और इस्पात के परिवहन के उद्देश्य से मुख्यतः बनाई जा रही है। इनके बन जाने के पश्चात् वर्तमान में इन वस्तुओं के परिवहन के कारण सड़कों पर पड़ रहे दबाव में भी उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे सड़कों का जीवन काल स्वमेव लंबा हो जाएगा। इन सभी रेल लाइनों पर यात्री ट्रेनें भी चलेगी। ये रेल लाइनें रेल परिवहन से वंचित इलाकों में यात्रियों को यातायात के एक सुगम व सस्ता साधन प्रदान करेगी। इस तरह से हम यह कह सकते हैं कि सरकार की इस अभिनव पहल से प्रगति के नए आयाम खुल रहे हैं। इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए हमने रेल मंत्रालय, भारत सरकार के साथ मिलकर एक नई संयुक्त उपक्रम कंपनी छत्तीसगढ़ रेलवे कार्पोरेशन लिमिटेड का गठन किया। इस कंपनी ने अब तक चार नई रेल लाइनों को चिन्हांकित किया है, जिसमें राज्य शासन की भागीदारी 51 प्रतिशत है एवं भारत सरकार का सहभागिता 49 प्रतिशत है। संयुक्त उपक्रम कंपनी द्वारा प्रथम चरण में लगभग 785 किमी की 14000 करोड़ रुपए से अधिक की 4 रेल परियोजनाओं का चयन किया गया, जिसमें से रेल मंत्रालय से 2 परियोजनाओं डोंगरगढ़-खैरागढ़-कवर्धा-मुंगेली-कोटाकटघोरा (280 किमी) एवं खरसिया-बलौदाबाजार-नया रायपुर-दुर्ग (270 किमी) कुल 550 किमी की 10000 करोड़ रुपए से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं पर सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हो चुकी थी। इनके निर्माण में राज्य सरकार का अंश मात्र 400 करोड़ रुपए होगा। इन प्रस्तावित लाइनों के संभावित उपयोगकर्ता को हितधारक बनाकर इक्विटी के माध्यम से निवेश कराया जाएगा और एसपीव्ही के माध्यम से क्रियान्वित कराया जाएगाडोंगरगढ़-कवर्धा- मुंगेली-कटघोरा लाइन के लिए एसपीवी का गठन हो चुका था तथा रेलवे मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त कर शिलान्यास भी किया जा चुका था। यह राज्य सरकार की दूरगामी सोच ही थी कि 21,300 करोड़ रुपए से अधिक की रेल परियोजनाओं का कार्य राज्य में होगा, जिसमें राज्य का अंश मात्र 620 करोड़ रुपए रहेगा और राज्य में 1100 किमी की नई रेल लाइनें बिछेगी। इन परियोजनाओं की स्वीकृति कराने के लिए हमने कई बार रेलमंत्री, कोयला मंत्री, इस्पात मंत्री के साथ बैठकें की। प्रधानमंत्रीजी से अनुरोध किया, पीएसयूएस के साथ बैठके की, तब जाकर इन परियोजनाओं की स्वीकृति हुई, कार्य आगे बढ़ा। अतः सरकार को पॉजीटिव सोच के साथ इन कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए, जिससे रेल से वंचित क्षेत्रों का विकास हो सके तथा वहां के लोगों को सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके