ALL देश- विदेश राज्य व शहर शिक्षा व्यापार खेल धर्म मनोरंजन स्वास्थ्य फिल्मिदुनियाँ
पितृ मोक्ष अमावस्या कल
November 29, 2019 • जगदीश सिकरवार • देश- विदेश

पितृ मोक्ष अमावस्या कल, यमघट योग में दी जाएगी पितरों को विदाई

इस बार यमघट योग में पितरों को विदाई दी जाएगी। पितृपक्ष का समापन 20 वर्ष बाद 28 सितंबर को होगा। इस दिन पंचग्रही सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध एवं शुक्र का महासंयोग होगा। मातृ शक्ति पीठ के पुजारी पं. शिवशंकर दुबे ने बताया कि सोलह श्राद्ध का समापन पितृ मोक्ष अमावस्या परिधावी संवत्सर के 28 सितंबर को पितृ विसर्जन सूर्योदय से सूर्यास्त तक होगा। इस बार सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर विशेष संयोग रहेंगे। इस वर्ष 20 साल बाद सर्व पितृमोक्ष अमावस्या शनिवार के दिन रहेगी। इस दिन का श्राद्ध कर्म करना अनंत फलदायक माना गया है। खास बात यह है कि पितृ पक्ष में शनिवार के दिन अमावस्या का योग बहुत ही सौभाग्यशाली है। इसी के साथ 28 सितंबर को गोचर में पंचग्रही योग भी बन रहा है। इस दिन कन्या राशि में चंद्र, मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य ग्रह भी उपस्थित रहेंगे, जो विशेष फलदायी होंगे।  ___ ज्योतिष के अनुसार.... ज्योतिषाचार्य ने बताया कि अमावस्या तक श्राद्ध श्रद्धा के साथ अपने पूर्वजों के प्रति तर्पण किया जाना चाहिए। जिनके पूर्वज जीवित न रहे उन्हें श्रद्धा के साथ गया, इलाहाबाद, हरिद्वार, नर्मदा, क्षिप्रा घाट पर श्राद्ध , पिंडदान, तर्पण आदि करना चाहिए। पितृदोष मुक्ति का निवारण सोलह श्राद्ध में होता है। मां चामुंडा दरबार भोपाल अपने भक्तों के साथ होशगाबाद में बुदनी घाट पर मां नर्मदा में स्नान करने के साथ पूर्वजों की पूजा-पाठ, तर्पण, हवन के बाद भंडारे के रूप में समापन होगा। पवित्र नदियों में सुबह जाकर कुशा, दूध, पानी, तिल के साथ पूर्वजों का तर्पण किया जाएगा। पूर्वजों को विदाई दी जाएगी। देव, ऋषि, पितृ, ऋण मुक्ति का दिन है, जिनके माता पिता जीवित हैं उन्हें श्राद्ध में तीर्थ यात्रा कराना चाहिए एवं उन्हें चाय, नाश्ता, भोजन कराने के साथ वस्त्र, दक्षिणा देकर चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए। श्राद्ध का श्रद्धा से गहरा संबंध हैं। मानव पर तीन प्रकार के कर्ज होते हैं। देव, ऋषि, पितरों का ऋण इनकी मुक्ति के लिए सोलह श्राद्ध किए जाते हैं। पूर्वजों की मृत्यु की तिथि अनुसार श्राद्ध का महत्व बताया है। त्रेता, द्वापर से कलयुग में भी यह परंपरा कायम हैं। जिनके माता-पिता जीवित है उन्हें श्राद्ध में तीर्थ यात्रा कराना चाहिए एवं उन्हें चाय, नाश्ता, भोजन कराने के साथ वस्त्र, दक्षिणा देकर चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए।