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महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा
November 29, 2019 • जगदीश सिकरवार • धर्म

प्राचीन शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली मंदिर में नवरात्रों में महाशक्ति की महापूजा के उपलक्ष्य में रविवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मां भद्रकाली जेति रथ, श्री गणेश, हनुमान, मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, राधाकिशन, मीरा बाई, राजा बलि और वामन सहित 30 झांकियों के साथ 2108 कलशधारी महिलाओं की शोभायात्रा को मुख्यातिथि उपायुक्त डा. एसएस फुलिया व रेनू फुलिया आईएएस ने झंडी देकर रवाना किया। इससे पहले मंदिर परिसर में उपायुक्त डा. एसएस फुलिया व रेनू फुलिया आईएएस ने मां भद्रकाली के समक्ष पूजा-अर्चना की और मां भद्रकाली रथ पर स्थापित ज्योत को प्रज्जवलित किया। उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने जिलावासियों को नवरात्र पर्व की बधाई दी और सभी के मंगल की कामना की। शोभा यात्रा अंबे तू है जगदंबे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है, भद्रकाली मंदिर को सोने का बनाना है और प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी आदि मधुर भजनों की धुनों की गूंज के साथ शहर के विभिन्न जगहों पर पहुंची। श्रीदेवीकूप भद्रकाली मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा व मां भद्रकाली सेवक मंडल के अध्यक्ष नरेंद्र वालिया ने बताया कि ढोल तांसा पार्टी फौजी बैंड और 6बैंड पार्टियों ने अपने-अपने अंदाज में मधुर भजन सुनाते हुए समा बांधा। नरेंद्र वालिया ने बताया कि विभिन्न समाजसेवियों तथा श्रद्धालुओं द्वारा 29 सितंबर से 13 अक्तूबर तक मंदिर में निरतर भंडारा दिया जाएगा। इस अवसर पर स्नेहिल शर्मा व अर्जुन नरकातारी सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। शारदीय नवरात्र की प्रथम आराध्य माता पार्वती हैं। पर्वत पुत्री के कारण वह शैलपुत्री के नाम से लोक प्रसिद्ध हुई। पूर्व जन्म में माता सती नाम से दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं। दक्ष ने शिव को यज्ञ का आमंत्रण न देकर अपमानित किया था, फिर भी पति की इच्छा के विरुद्ध सती यज्ञ में शामिल होने पहुंची, जहां उनका तिरस्कार हुआ।इससे क्षुब्ध सती ने यज्ञवेदी में कूदकर शरीर की आहुति दे दी। अगले जन्म में मां ने हिमाचल की पत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने कठोर तपसे शिव को प्रसन्न किया और दोनों का मंगल परिणय संपन्न हुआ। मां को शिवांगी भी कहते हैं।