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माता-पिता की सेवा व सम्मान
November 28, 2019 • जगदीश सिकरवार • राज्य व शहर

जीवित माता-पिता की सेवा व सम्मान करना ही सच्चे श्राद्ध

आर्य केंद्रीय सभा द्वारा श्राद्ध पर्व के अवसर पर मातृ-पितृ सम्मान दिवस का आयोजन आर्य समाज सेक्टर-6 में किया गया। कार्यक्रम का आरंभ पंडित राजीव आर्य व पंडित शिव प्रसाद द्वारा यज्ञ करके करवाया गया। इस कार्यक्रम में वयोवृद्ध विभूतियों प्रिंसिपल सुमित्रा कुकरेजा, कृष्णा आर्य, सावित्री आर्या, विशना देवी एवं कृष्णा वर्मा का सम्मान पत्र एवं उपहार देकर सम्मान किया गया। आर्य केंद्रीय सभा के प्रधान प्रो. आनन्द सिंह आर्य एवं महामंत्री स्वतंत्र कुकरेजा करनाल। आर्य केंद्रीय सभा के सदस्य मुख्यातिथि ने कहा कि जीवित माता-पिता, पारिवारिक सदस्यों की सेवा एवं सम्मान करना ही सच्चा श्राद्ध है। अगर हम उनके जीवित रहते उनका मुख्यातिथि व अन्य का स्वागत करते हुए। आदर मान एवं सेवा करते हैं तो ही उनको आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है कि उनके जाने के बाद। उन्होंने कहा कि आर्य समाज का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वह समाज में फैली बुराइयों को समाप्त करके लोगों को सच्ची राह दिखाए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वैदिक विद्वान आचार्य ओमप्रकाश शास्त्री पानीपत ने कहा कि जो संतानें श्रद्धा से अपने माता-पिता की सेवा करती हैं वही सच्चा श्राद्ध होता है। अपनी सेवा से माता-पिता की आवश्यकताओं को पूरा करना अर्थात तृप्त करना यही तपन कहलाता है। जिसने अपने माता- पिता को जीते जी ढंग से पानी नहीं पिलाया उसके गंगा नहाने से क्या होगा। आज सबसे बड़ी आवश्यकता बच्चों को स पत्ति नहीं संस्कार देने की है। संपत्ति दे दी और संस्कार नहीं दिए तो वह संतान स पत्ति को भी बर्बाद कर देगी। जीव की मुक्ति उसके कर्मों के अनुसार मिलती है न कि श्राद्ध कर्म करके। कार्यक्रम के अध्यक्ष शांतिप्रकाश आर्य ने कहा कि श्राद्ध एक पर्व है और पर्व का अर्थ है जोड़ना। हमारा एक परिवार है, जिसमें माता-पिता, गुरुजन, बंधु बांधेवर हम सब एक- दूसरे से जुड़कर रहें। एक-दूसरे का अपमान न करें, इसलिए हम यज्ञ के रूप में पितृ यज्ञ करते हैं। श्राद्ध केवल साल में 15 दिन की जाने वाली क्रिया नहीं है यह तो प्रतिदिन होने वाला कार्य है। इस अवसर पर सम्मानित माताओं के पुत्र विवेक आर्य, राजीव नंदवानी, डा. दीनबंधु, अनिल अरोड़ा, योगेश अरोड़ा एवं स्वतंत्र कुकरेजा तथा सम्मानित अतिथि सत्येंद्र मोहन कुमार, देशराज सचदेवा, देशराज बजाज, आरके ठकराल, देशपाल ठाकुर, भोपाल आर्य, ओमप्रकाश आर्य, दिलबाग आर्य, अजय आर्य, रोशन आर्य, हरेंद्र चौधरी, सुभाष चौधरी, ओपी सचदेवा, विजय आर्य, योगेश शर्मा, शकुंतला सुखीजा, रानी दुर्गावती, प्रेम, राज कुकरेजा, कमलेश आर्य, रजनी नंदवानी, मीनाक्षी कुकरेजा, प्रिया आर्या व कांता नंदवानी आदि मौजूद रहे