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कामकाज ठप
November 28, 2019 • जगदीश सिकरवार • व्यापार

ई-ट्रेंडिंग के विरोध में हड़ताल पर रहे आढ़ती, कामकाज ठप

ई-ट्रेडिंग का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को प्रदेश के साथ घरौंडा की अनाज मंडी भी बंद रही। सभी आढ़ती हड़ताल पर रहे। आढ़ती अपनी दुकानों के अंदर आराम से बैठे रहे। किसानों की धान की बोली नहीं की गई। मंडी में धान लेकर पहुंचें किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ामंडी आढ़तियों ने कहना है कि आज उन्होंने एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की है। अगर सरकार ने मांगे नहीं मानी तो आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी। मंडी प्रधान सुशील गर्ग, आढ़ती धीरज भाटिया, कपिल कुमार, पवन गुप्ता, राजेश गुप्ता, चेतनदेव व अन्य मंडी व्यापारियों का कहना है कि सरकार की वायदा खिलाफी से सभी आढतियों में रोष हैसरकार एक अक्तूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करने जा रही है लेकिन सरकार ने अभी तक पॉलिसी ही जारी नहीं की है। सरकारी खरीद के दौरान बाहरी प्रदेशों की धान की खरीद होगी या हरियाणा की मंडियों के साथ-साथ घरौंडा मंडी में भी धान की बोली नहीं हुई। ऐसे में मंडी में धान लेकर पहुंचे किसानों की धान की बोली ही नहीं की गई। किसान रामस्वरूप, सुबे सिंह, लखनपाल, सुधीर व अन्य का कहना है कि मंडी में उनकी धान पड़ी है लेकिन कोई भी खरीदने वाला नहीं है। मंडी के व्यापारी हड़ताल पर है। जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल को लेकर नहीं मिली कोई सचना वहीं मार्किट कमेटी के सचिव चंद्रप्रकाश ने बताया कि मंडी में हड़ताल को लेकर उनको किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने मंडी का विजिट किया था जिसमें हड़ताल जैसी को स्थिति देखने को नहीं मिली। किसान अपनी धान लेकर मंडी में पहुंच रहे है। । नहीं, धान खरीद पर पेमेंट का होने पर 12 प्रतिशत ब्याज देने की मोड्यूल ही जारी नहीं किया है। घोषणा की थी, लेकिन फिर भी कुछ दूसरा सरकार ने 72 घंटे में पेमेंट न नहीं मिला। इसके अतिरिक्त ई-  प्रणाली लागू कर आढ़तियों परेशान किया जा रहा है। इस योजना के लागू होने से आढ़तियों को कोई फायदा नहीं होने वाला, बल्कि सीजन के दौरान कामकाज प्रभावित होगा। अभी प्रदेशभर की मंडियों इस योजना को लागू करने के लिए तैयार नहीं है। सरकार नई-नई योजनाएं थोपकर आढ़तियों को परेशान कर रही है। आढ़तियों की मांग है कि ई- ट्रेडिंग पर रोक लगाई जाए। मंडी में फसलों की खरीद आढ़तियों के माध्यम से होनी चाहिए। यदि सरकार व्यापारियों की मांगों को नहीं मानती है तो राज्य कमेटी के निर्देश पर आगामी फैसला लिया जाएगा।