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जलवायु परिवर्तन पर नई पीढ़ी गंभीर
November 29, 2019 • जगदीश सिकरवार • देश- विदेश

जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में सोलह वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता स्वीडकिशोरी ग्रेटा थुनबर्ग ने सवाल उठाने के साथ गुस्सा भी जताया है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन को संबोधित करते हुए ग्रेटा ने अपने 15 युवा साथियों के साथ विश्वभर के नेताओं के सामने बढ़ते वैश्विक तापमान को लेकर अपनी चिंता दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा है कि खासतौर से पांच देशों ने ग्लोबल वार्मिंग की शर्तों का उल्लंघन करते हुए इस पर नियंत्रण की कोई पहल नहीं की। जर्मनी, फ्रांस, ब्राजील, अर्जेंटीना एवं तुर्की बाल अधिकार सम्मेलन के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में नाकाम रहे हैंयाद रहे जर्मनी की चांसलर ने कहा था कि जी-20 देश जलवायु संकट के समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। हालांकि अमेरिका ने इसी समय पेरिस समझौते से बाहर निकलने की घोषणा कर दी थी। समची दुनिया में जहां धरती को बचाने की चिंता की जा रही है, वहीं अमेरिका ने इस जलवाय संकट को व्यापार का सुनहरा अवसर मान लिया है। अमेरिका के इस कुतर्क से दुनिया के पर्यावरणविद् हैरान हैं। क्योंकि आर्कटिक में पिघलती बर्फ का सीधा संबंध सूखे, बाढ़ और लू के साथ माना जा रहा है। समुद्री व हिमालयी बर्फ के पिघलने से जलस्तर बढ़ रहा है। जिसके नतीजे दिखने लगे हैं। इंडोनेशिया ने अपनी राजधानी जकार्ता बदलने का प्रस्ताव संसद से पारित करा लिया है। समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण जकार्ता का बड़ा हिस्सा 2050 तक डूब सकता है। भारत में भी समुद्र के जल स्तर में वृद्धि की वजह से समुद्र तटीय इलाकों में तूफान, सुनामी, तटीय बाढ़, ऊंची लहरों और निचले इलाकों में मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है। पिछले 50 साल के भीतर समुद्र के जल में 1.3 मिली लीटर की सालाना वृद्धि दर्ज हुई है। पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर स्थित समुद्र के जल में 1948 से 2005 के बीच 5.16 मिली मीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। गुजरात के कांडला में बीती एक सदी के भीतर 2.89 मिली मीटर की दर से समुद्र का जल स्तर बढ़ा है। साफ है कि भारत जलवायु संकट के बड़े खतरे की ओर बढ़ रहा है। विश्व मौसम संगठन के अनुसार पूर्व औद्योगिक काल से आज तक दुनिया का तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। 1850-1900 में तापमान के स्तर में 2018 के पहले 10 महीनों के दौरान औसत 0.98 डिग्री सेल्सियस अधिक है। पिछले 22 साल में 20 सबसे गर्म साल रहे हैं। यदि यही प्रकृति बनी रही तो 2100 तक तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि का अनुमान है। ताजा विश्व ऊर्जा संख्यिकी की समीक्षा के अनुसार चीन दुनिया में सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जन 27 प्रतिषत करता है। अमेरिका 15, रूस 10 और भारत महज 7.1 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन करते हैं। अमेरिका में कोयले से कुल खपत की 37 फीसदी बिजली पैदा की जाती है। कोयले से बिजली उत्पादन करने से सबसे ज्यादा ग्रीन हाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं। इस दिशा में भारत ने बड़ी पहल करते हुए 50 करोड़ एलईडी बल्बों से प्रकाश की व्यवस्था लागू कर दी है। अगली कड़ी में सघन औद्योगिक ईकाइयों की ऊर्जा खपत को घटाया जा रहा है। किंतु अमेरिका ने कोयले की चुनौती से निपटने के अब तक कोई उपाय नहीं किए हैं? अमेरिका के 600 कोयला बिजली घरों से ये गैसें वायुमंडल को दूषित कर रही हैं।