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गुफ्तगू दिल से दिल की
November 27, 2019 • जगदीश सिकरवार • राज्य व शहर

तारिक कमरसमकालीन उर्दू शायरी में एक जाना-पहचाना नाम है। उनकी शायरी ने आम लोगों के साथ-साथ गोपीचंद नारंग, निदा फाजली, बशीर बद्र, वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी और जावेद अख्तर जैसे नामी-गिरामी साहित्यकारों से भी भरपूर प्रशंसा पाई है। साहित्य और कला में यह मानी हुई बात है कि अगर केवल कौशल की बदौलत कोई चीज सामने आती है तो वह दूर तक नहीं जा सकतीइनसानियत और सच्चाई के साथ उसका क्या वास्ता है, यह काफी अहमियत रखता है। अगर वह इनसानियत और सच्चाई की तरफदार होती है तो वह पाठक, श्रोता या दर्शक की जिंदगी का हिस्सा बन सकती है, मगर केवल कौशल हो तो वह सजावट की चीज होने से आगे नहीं बढ़ सकती। गोकि कौशल कोई गैरजरूरी चीज नहीं है, लेकिन यह सच है कि शायरी सिर्फ इल्म के बूते नहीं आ सकती। ____ इस सिलसिले में तारिक की शायरी गौरतलब है, जिसमें इनसानियत और सच्चाई के साथ उनकी वफादारी और शायरी के हुनर का बेहतरीन मेल दिखाई देता है। शायरी एक तरह से जोखिम का काम भी है, क्योंकि एक संजीदा शायर उस सच को बयान करता है, जिससे लोग अकसरकतराते हैं। तारिक इस बात को इस तरह कहते हैं सच बोलें तो घर में पत्थर आते हैं, झूठ कहें तो खुद पत्थर हो जाते हैं। उनके लिए 'सांस लेना फकत कोई जिंदगानी नहीं है और शायरी का मतलब दिल की आग में हाथ डालना हैआग में दिल की हाथ डाले कौन, जानलेवा ये रोग पाले कौन। ____ उनकी शायरी में नएपन का आह्वान है- अहदे-नौ तेरा नसब पूछ रहा है तारिक, अपना शजरा जरा पारीना रिवायत से निकाल।तारिक की शायरी की इस किताब से गुजरते हुए आपका जिंदगी पर और उसके लिए संघर्ष परयकीन और पुख्ता होता है। हवा जल्दी में है, तारिक कमर; मंजुल पब्लिशिंग हाउस, भोपाल (मध्य प्रदेश); मूल्य : 250 रुपये 

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