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धोनी को लेकर दुविधा
November 26, 2019 • जगदीश सिकरवार • खेल

धोनी को लेकर दुविधा, संन्यास के फैसले को लेकर जूझते रहे हैं भारतीय क्रिकेटर

भारतीय क्रिकेट में संन्यास किसी पहेली की तरह है जहां कुछ खिलाड़ियों ने सही समय यह फैसला किया जबकि कुछ इस बारे में फैसला लेने के लिए जूझते दिखे। महेन्द्र सिंह धोनी के भविष्य पर जारी दुविधा ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में से एक कब खेल को अलविदा कहेगा। झारखंड के 38 साल के धोनी पिछले दो महीने से टीम के साथ नहीं हैं और नवंबर से पहले उनके टीम के साथ जुड़ने पर भी संशय बरकरार है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास को लेकर अब तक धोनी की ओर से कुछ नहीं कहा गया हैबीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, 'इस बात की संभावना बेहद कम है कि धोनी बांग्लादेश के दौरे के लिए उपलब्ध होंगेबीसीसीआई में हम सीनियर और ए टीम के क्रिकेटरों के लिए 45 दिन पहले मैचों (अंतररराष्ट्रीय और घरेलू) की तैयारी कर लेते है। और घरेलू) की तैयारी कर लेते है। जिसमें प्रशिक्षण, डोपिंग रोधी कार्यक्रम से जुड़ी चीजे शामिल हैं। यह पता चला है कि मंगलवार से शुरू हो रही विजय हजारे राष्ट्रीय एकदिवसीय चैंपियनशिप में धोनी झारखंड के लिए नहीं खेलेंगे। दिग्गज सुनील गावस्कर ने हाल ही में एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा था, 'मुझे लगता है वह खुद ही यह फैसला कर लेंगे। हमें महेन्द्र सिंह धोनी से आगे के बारे में सोचना चाहिए। कम से कम वह मेरी टीम का हिस्सा नहीं होंगे।' गावस्कर को एक क्रिकेटर के तौर पर सीधे स्पष्ट तौर पर बोलने के लिए जाना जाता है

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सौरव गांगुली : फार्म में रहते लिया संन्यास

पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के लिए टेस्ट क्रिकेट में आखिरी के दो साल शानदार रहे। उन्होंने 2008 के आस्ट्रेलिया दौरे से पहले संन्यास की घोषणा कर दी क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि चयनकर्ता उन्हें एक बार फिर टीम से बाहर करें। धोनी की सलाह पर द्रविड़ और गांगुली को एकदिवसीय टीम से ! पर द्रविड़ और गांगुली को एकदिवसीय टीम से बाहर किया गया लेकिन 2011 में टेस्ट श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन कर द्रविड़ ने एकदिवसीय टीम में जगह बनाई। द्रविड़ ने हालांकि घोषणा कर दी कि यह उनकी आखिरी एकदिवसीय श्रृंखला होगी इसके छह महीने बाद आस्ट्रेलिया में खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया।

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तेंदुलकर, सहवाग और गंभीर को लगा समय

सचिन तेंदुलकर के लिए हालांकि मामला बिल्कुल अलग था। वह शतक नहीं बना पा रहे थे लेकिन बल्ले से ठीक-ठाक योगदान दे रहे थे। वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर भी उन खिलाड़ियों में शामिल रहे जिन्हें यह समझने में थोड़ा समय लगा कि भारतीय टीम में उनका समय खत्म हो गया। इसमें कोई शक नहीं कि महेन्द्र सिंह धोनी ने लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा कि है लेकिन पर्दे पर धोनी का किरदार निभाने वाले सुशांत सिंह राजपूत का एक संवाद है 'हम सभी सेवक हैं और राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।' धोनी को शायद इसका मतलब समझना होगा।

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