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बदलते भारत की तस्वीर
November 26, 2019 • जगदीश सिकरवार • देश- विदेश

दुनिया के देशों के सामने रविवार 22 सितंबर को अमेरिका के ह्यूस्टन शहर का भारतीय समयानुसार रात करीब 9 बजे का नजारा कुछ अलग ही था। दुनिया की दो बड़ी ताकतों के मुखिया एक मंच पर एक साथ हाउडी मोदी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह हमारे देश के लिए इसलिए गौरव की बात है कि अमेरिका जो एक समय सीधे मंह बात करने में अपनी तौहीन समझता था, उससे आज हमारे प्रधानमंत्री आंख से आंख मिलाकर बात करने लगे हैं। मजे की बात यह कि अमेरिका जैसा देश और वहां की व्यवस्था भारत को राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने को मजबूर होने लगी है। दुनिया के राजनयिकों के लिए यह अमेरिका के अगले साल होने वाले चुनावों के अभियान की शुरुआत भी मानी जा रही है। और मानी भी क्यों नहीं जाए क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में लोकसभा चुनावों की तर्ज पर वहां भी नारा दे ही दिया कि अबकी बार ट्रंप सरकार। इस संबोधन के साथ ही 50 हजार लोगों से खचाखच भरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दुनिया के 200 करोड़ लोगों द्वारा मोदी-ट्रंप की इस जुगलबंदी को लाइव प्रसारण को देखे जाने के दावे किए जा रहे हैं। भले ही यह दावे अतिशयोक्तिपूर्ण लगे पर इसमें कोई दो राय नहीं कि दुनिया के देशों की आंखें इस हाउडी मोदी पर टिकी रहीं- इसे भारतीय विदेश नीति की बड़ी जीत कहा जाए या कुछ और पर अब यह साफ हो गया है कि आज का भारत बहुत कुछ बदल गया है। एक समय था जब दुनिया के देशों के दो पावर सेक्टर अमेरिका और सोवियत रूस होते थे। समय बदला चीन नई ताकत में उभर कर आयापर पिछले पांच छह सालों में भारत की विदेश नीति ने जिस तरह से करवट ली है उससे दुनिया के देशों के सामने भारत बराबर की शक्ति के रूप में उभरा है। आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के देश भारत के साथ आए हैं। दुनिया के किसी देश की हिम्मत खुलकर पाकिस्तान का पक्ष लेने की नहीं हो रही है। यहां तक कि जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर दुनिया का कोई देश पाकिस्तान के पक्ष में नहीं आया है और किसी देश ने जम्मू कश्मीर में धारा 370 और 35ए पर हमारे देश के निर्णय का दबे शब्दों में भी विरोध नहीं किया है। बल्कि आज भारत दुनिया के देशों के देशों के सामने जम्मू कश्मीर का आंतरिक मामला सिद्ध करने के साथ ही खुलकर पीओके की बात पुरजोर शब्दों में करने लगा है। कश्मीर की वर्तमान स्थिति पर दुनिया का कोई देश प्रश्न चिन्ह उठाने आगे नहीं आया है। यह हमारी विदेश नीति की बड़ी जीत है। अमेरिका के एस्टन शहर में हाउडी मोदी सम्मेलन में ट्रंप का मोदी के साथ आना ही अपने आप में बड़ी बात है वहीं इस सम्मेलन में 50 हजार लोगों की उपस्थिति भी बड़ी बात है। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम और मोदी-ट्रंप का संबोधन अपने आप में संदेश है। दोनों ही नेताओं ने खुलकर इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का संदेश दिया तो दूसरी ओर आर्थिक मोर्चे पर भी साझा प्रयास करने पर सहमति बनी। ट्रंप ने कहा कि दोनों ही देशों के संविधान के शुरुआती तीन शब्द वी द पिपुल है। इसके माध्यम से हम का संदेश दिया गया है। सीमाओं की सुरक्षा की बात भी खुलकर आई तो आपसी सहयोग के समझौते भी हुए। भले ही आलोचकों द्वारा इस मंच का उपयोग ट्रंप द्वारा अगले साल होने वाले चुनावों के लिए किया जाना माना जा रहा हो, लेकिन यह कोई मामूली जलसा नहीं था। यह कोई चुनावी सभा भी नहीं थी। बल्कि यह पहला मौका है जब दुनिया के दो बड़े देशों के प्रमुख इस तरह के कार्यक्रम में एक साथ आए हैं। जिस गर्मजोशी से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया और जिस गरमजोशी से मोदी-ट्रंप की जुगलबंदी सामने आई उससे दुनिया के देश हतप्रभ रह गए हैं। हालांकि मोदी ने अपनी शैली में अपने परिवार से मिलाने की बात कही तो अबकी बार ट्रंप सरकार का नारा भी दे दिया। आज दुनिया के देशों के सामने दो ही बड़े मुद्दे हैं और वे या तो आतंकवाद को लेकर है या फिर आर्थिक मंदी को लेकर। हाउडी मोदी कार्यक्रम ने इस्लामी आतंकवाद की खिलाफ भारत और अमेरिका के साथ लड़ने का संकल्प कर सारी दुनिया को इसके लिए आगे आने का संदेश भी दे दिया है वहीं आर्थिक क्षेत्र में भी परस्पर सहयोग के समझौते कर एक दूसरे में विश्वास व्यक्त किया है। सालाना 50 लाख टन एलएनजी का आयात के दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे। इसे यूं भी देखा जा सकता है कि कहीं न कहीं चीन पर भी दबाव बनेगा और वह भारत के खिलाफ पाकिस्तान का पक्ष लेने या कुछ करने से पहले दस बार विचार करेगा। मजे की बात यह है कि धुर विरोधियों के साथ आज भारत तालमेल बनाने में सफल हो रहा है। एक ओर अमेरिका तो दूसरी ओर रूस से हमारे बेहतर ही नहीं बल्कि बहुत अच्छे संबंध हैं। इसी तरह से कोई इस्लामिक देश भारत की खिलाफत नहीं कर रहा है। ऐसे में हाउडी मोदी जैसे कार्यक्रमों को हल्के में नहीं लेना चाहिए बल्कि यह साफ हो जाना चाहिए कि दुनिया के देशों में भारत की भूमिका में बदलाव आया है और आज भारत पिछलग्गू देशों में न होकर अपनी अहमियत सिद्ध करने में सफल हो गया है। इसलिए हाउडी मोदी को मजमा या ट्रंप का चुनाव अभियान नहीं कहकर भावी संकेतों को समझना होगा।

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