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41 सरकारी कर्मचारियो को नहीं मिलेगी
November 25, 2019 • जगदीश सिकरवार • राज्य व शहर

41 सरकारी कर्मचारियों को अब नहीं मिलेगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

जिले के सरकारी विभागों में कार्यरत 41 कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति नहीं दी जाएगी। पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में जिला प्रशासन की छानबीन समिति द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार ने किनारे कर दिया है। पूरे प्रदेश में अनिवार्य सेवानिवृत्ति की फाईल बंद हो गई है। लिहाजा समस्त विभागों में 50 साल की उम्र व 20 साल की सर्विस पूरी करने वाले कर्मचारी भी अपने पद पर बने रहेंगे। उल्लेखनीय है कि भाजपा शासनकाल में वर्ष 2017 में राज्य शासन ने 20 साल की शासकीय सेवा पूर्ण कर चुके या फिर 50 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले शासकीय सेवकों के कार्यों की समीक्षा कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिलाने की दिशा में कार्य शुरु किया था। शासन ने शासकीय कार्यों में कसावट लाने निष्क्रय कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया था। इसके लिए सभी 41 विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए मापदण्ड निर्धारित किया गया था। निर्धारित किया गया था। कर्मचारियों के स्तर के आधार पर प्रदेश, संभाग एवं जिला स्तरीय छानबीन समिति का गठन किया गया था। जिसे कर्मचारियों की सेवा अवधि में प्रदर्शन कार्यक्षमता, ईमानदारी, सरकारी कार्यालय में उपस्थिति सहित अन्य बिंदुओं पर शासन को गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर अनुशंसा भेजने की जिम्मेदारी दी गई थी। जिले में तत्कालीन कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक कलेक्टर मो कैसर अन्दल हक की अध्यक्षता में सर्विस रिव्यू कमेटी ने अगस्त 2017 में जिले के सभी विभागों से रिपोर्ट मंगाया था। कलेक्टर की अध्यक्षता में विभागवार प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा कर प्रशासन ने निर्धारित मापदण्ड के आधार पर 41 कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने योग्य पाया था। इन कर्मचारियों की अनुशंसा कर राज्य शासन को आवश्यक कार्यवाई के लिए प्रतिवेदन भेज दिया गया था। लेकिन आज 2 साल बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जाता है कि कांग्रेस सरकार कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के पक्ष में नहीं है। यही वजह है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति की फाईल लगभग बंद हो गई है।

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