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सभी धर्मों के सम्मान की है भारतीय विरासत
September 29, 2018 • Jagdish Shikarwar

सम्राट अशोक से राधाकृष्णन तक के कथन हैं फैसले में

मस्जिद के इस्लाम का अभिन्न अंग होने या नहीं होने से जुड़े मुद्देहिस्सा हिस्सा किए किए किए किए  पर फैसला सुनाते हुए बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति से लेकर सम्राट अशोक तक कई हस्तियों की कही बातों का जिक्र किया। । शीर्ष अदालत के फैसले में बहुमत की तरफ रहे। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण ने धार्मिक टकराव के मुद्दे पर बोलने के लिए पूर्व राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन के एक कथन का सहारा लिया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति की लिखी किताब 'द हिंदू व्यू ऑफ लाइफ' मे लिखी गई लाइनों को पढ़ाको भविष्य में स्वीकारने की संभावना मुझे निश्चित कहा, हम अपने ऐतिहासिक देश की संपन्न संस्कृति चाहते हैं, जो हमेशा से पूरे विश्व के लिए सीखने और बाद पीठ ने सम्राट अशोक के कई संदेशों का भी जगह उत्कीर्ण हैं और दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान की धर्मों के टकराव के हिंदू समाधान मालम देती है। इसके बाद पीठ ने । और विरासत की भी याद दिलाना प्रेरणा पाने का स्रोत रही है। इसके हवाला दिया, जो पत्थरों पर जगहभावना को दर्शाते हैं। ठ ने 1994 में इस्माइल फारूकी मामले में बहुमत से फैसला Tी लिखने वाले जस्टिस जेएस वर्मा और जस्टिस एसयू खान के शब्दों को भी याद किया। पीठ ने कहा, हम याद दिला दें कि दोनों ही देश के प्रमुख समुदायों हिंदू और मुस्लिम का हिस्सा हैं। जस्टिस वर्मा ने कहा था कि उनका फैसला सहिष्णुता में यकीन रखने वाले हिंदुत्व के बड़े भाव को । प्रदर्शित करता है। हिंदुत्व की सहिष्णुता ही इस्लाम, ईसाई, पारसी, बौद्ध, जैन और सिख धर्म को अपनी धरती पर शरण और को अपनी धरती पर शरण और सहयोग प्रदान करती है। पीठ ने कहा, जस्टिस एसयू खान ने भी अपने निर्णय में एक विचारपूर्ण संदेश दिया था। जस्टिस खान ने कहा था कि मुस्लिमों को इस पर भी विचार करना चाहिए कि इस समय पूरा विश्व मुस्लिम समुदाय के अन्य धर्मों के साथ संबंधों को लेकर इस्लाम की सही शिक्षाओं के बारे में जानना चाहता है। दुश्मनी, दोस्ती, शांति और सहिष्णुता, सभी को अपने संदेश से प्रभावित करने का मौका। जब चाहो और जहां चाहो, जाने का मौका। इन सब बातों से मुस्लिम भारत में एक । विशिष्ट पोजिशन का लुत्फ ले रहे हैं। बता दें कि जस्टिस एसयू खान वर्ष 2010 में अयोध्या विवाद पर । फैसला सुनाने वाली इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ का भी हिस्सा थे।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और

जस्टिस अशोक भूषण